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Virat kohli and Anushka Sharma viral dance video

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लोहगढ़ किला : भारत काम एकमात्र अजय दुर्ग

राजस्थान के भरतपुर जिले में स्तिथ ‘लौहगढ़ के किले’ को भारत का एक मात्र अजेय दुर्ग कहा जाता है क्योंकि मिट्टी से बने इस किले को कभी कोई नहीं जीत पाया यहाँ तक की अंग्रेज भी नहीं जिन्होंने इस किले पर 13 बार अपनी तोपों के साथ आक्रमण किया था। राजस्थान को मरुस्थालों का राजा कहा जाता है। यहां अनेक ऐसे स्थान हैं जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इन्हीं में से एक है लौहगढ़ का किला। इस किले का निर्माण 18वीं शताब्दी के आरंभ में जाट शासक महाराजा सूरजमल ने करवाया था। महाराजा सूरजमल ने ही भरतपुर रियासत बसाई थी। उन्होंने एक ऐसे किले की कल्पना की जो बेहद मजबूत हो और कम पैसे में तैयार हो जाए। उस समय तोपों तथा बारूद का प्रचलन अत्यधिक था, इसलिए इस किले को बनाने में एक विशेष युक्ति का प्रयोग किया गया जिससे की बारूद के गोले भी दीवार पर बेअसर रहे। तोप के गोले समा जाते थे दीवार के पेट में यह राजस्थान के अन्य किलों के जितना विशाल नहीं है, लेकिन फिर भी इस किले को अजेय माना जाता है। इस किले की एक और खास बात यह है कि किले के चारों ओर मिट्टी के गार...

मैं भारत का किसान हूं

मैं किसान हूँ भारत का और सबका अन्न-विधाता हूँ सब जन्म मुझी से पाते हैं सब मेरी पैदा खाते हैं अन्न-खाद्य सामग्री सब मैं तुमको देता आया हूँ फिर भी तुमने क्यों समझा है ज्यों मैं ग़ैरों का जाया हूँ ? सीमा पर गोली खाने को जो सीना आगे आता है उन सीनों में दिल मेरा है ये तुम्हें समझ नईं आता है ? शहरों में गाली सुनता हूँ गांवों में वोटर जनता हूँ जब कभी पुकार कोई आए तो 'सुन ओ गवांर !' भी सुनता हूँ अब ये क्या किया ? पाप है यह... कैसा पैशाचिक मानस है नीच नराधम कर्म है यह यह हत्या से भी बढ़कर है अधिग्रहण तो पहले होता था यह ग्रहण बलात-हरण है अब देखो ! किसान को मत छेड़ो वो पहले से ही शापित है यदि फुंकार उठी ज्वाला सिंहासन भस्म हुए समझो

शूरवीर महाराणा प्रताप

शूरवीर महाराणा प्रताप का गौरवमयी इतिहास व जीवन राजपूतों की सर्वोच्चता एवं स्वतंत्रता के प्रति दृणसंक्लपवान वीर शासक एवं महान देशभक्त महाराणा प्रताप का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है। महाराणा प्रताप अपने युग के महान व्यक्ति थे। उनके गुणों के कारण सभी उनका सम्मान करते थे।ज्येष्ठ शुक्ल तीज सम्वत् (9 मई )1540 को मेवाड़ के राजा उदय सिंह के घर जन्मे उनके ज्येष्ठ पुत्र महाराणा प्रताप को बचपन से ही अच्छे संस्कार, अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान और धर्म की रक्षा की प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली।  चेतक पर सवार महाराणा प्रताप सादा जीवन और दयालु स्वभाव वाले महाराणा प्रताप की वीरता और स्वाभिमान तथा देशभक्ति की भावना से अकबर भी बहुत प्रभावित हुआ था। जब मेवाङ की सत्ता राणा प्रताप ने संभाली, तब आधा मेवाङ मुगलों के अधीन था और शेष मेवाङ पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिये अकबर प्रयासरत था। राजस्थान के कई परिवार अकबर की शक्ति के आगे घुटने टेक चुके थे, किन्तु महाराणा प्रताप अपने वंश को कायम रखने के लिये संघर्ष करते रहे और अकबर के सामने आत्मसर्मपण नही किये।जंगल-जंगल भटकते हुए तृ...

बाहुबली :-बदलता भारतीय सिनेमा

करन जौहर ने राजमौली के साथ सेल्फी शेयर करते हुए उनको वर्तमान का महान निर्देशक मान लिया हैं..रामगोपाल वर्मा ने तो हाथ ही खड़े कर दिए हैं..आमिर,सलमान,शाहरुख के होश फाख्ता हैं कि ये सब क्या हो रहा भाई ? न ईद न दीवाली, न होली न क्रिसमस..आईपीएल के बुखार में डूबता-उतराता भारत आज बाहुबली देखने के लिए क्यों मरा जा रहा..? यहाँ तो अपनी एक फिल्म हिट कराने के लिए क्या-क्या नहीं प्रोपगेंडा करना पड़ता है...प्रमोशन से लेकर पीआर पर करोड़ों रुपया खर्च कर देना पड़ता है.. लेकिन जनता आज तक इस कदर कभी पागल न हुई..थियेटर का माहौल कभी ऐसा नहीं हुआ..आज थिएयर का माहौल ऐसा लग रहा मानों हाउसफूल इडेन गार्डन में सचिन पाकिस्तान के खिलाफ क्रीज पर डटें हों..चिल्लाती भीड़ के बीच आखिरी ओवर में बारह रन बनाना हो.या फिर दुबई क्रिकेट स्टेडियम में नरेंद्र मोदी आज अप्रवासी भारतीयों को सम्बोधित करने वाले हों.. ये माहौल देखकर बड़े-बड़े ट्रेड पंडित ही नहीं..सिनेमा के दिग्गज इस कदर हैरान हैं कि आज एक नामी फिल्म समीक्षक ने महेश भट्ट के हवाले से कहा है कि "भारतीय फिल्मों का इतिहास जब लिखा जाएगा तो बाहुबली के पहले और बाहुबली के ...

अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया के अति पावन शुभ अवसर पर इस बार राजा सूर्य और मंत्री गुरु का दिव्य संयोग बन रहा है। ज्योतिषी के अनुसार 24 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन 12 वर्ष बाद राजा-मंत्री यानी गुरु-सूर्य का सुंदर योग बन रहा है। इससे पहले 6 मई 2000 को ऐसा योग बना था। 2012 के बाद 2024 में यह योग बनेगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र पूरे दिन-रात को रहेगा। अक्षय तृतीया को अनंत-अक्षय-अक्षुण्ण फलदायक कहा जाता है। इस दिन सूर्य एवं चंद्रमा दोनों ही अपनी-अपनी उच्च राशि में रहेंगे और वह भी गुरु के साथ। सूर्य के साथ मेष राशि में गुरु भी रहेंगे। जो कभी क्षय नहीं होती उसे अक्षय कहते हैं। कहते हैं कि इस दिन जिनका परिणय-संस्कार होता है उनका सौभाग्य अखंड रहता है। इस दिन महालक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए भी विशेष अनुष्ठान होता है जिससे अक्षय पुण्य मिलता है। स्वयंसिद्ध मुहूर्त : इस दिन बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। क्योंकि शास्त्रों के अनुसार इस दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है। इस बार की अक्षय तृतीया पर मंगलवार के दिन सूर्यदेवता अपनी उच्च राशि मेष में रहेंगे। और वही इस दिन के स्वामी भी होंगे। रात्रि क...

Yaadein

Yaadon ko bhulane mein, Kuch der toh lagti hain.. Aankhon ko sulane mein, Kuch der toh lagti hain.. Kisi shakhs ko bhula dena, Itna aasaan nahi hota.. Dil ko samjhane mein, Kuch der toh lagti hain.. Bhari mehfil mein jab koi, Achanak yaad aa jaaye, Fir aansoo chupane mein, Kuch der toh lagti hain.. Jo shakhs jaan se pyara ho, Achanak door ho jaaye, Dil ko yaqeen dilane main, Kuch der toh lagti hain…..!!